सनातन धर्म के विविध आयामों को नहीं जान पाने की वजह से ही कई लोगों को लगता है कि सनातन धर्म के विविध मार्गदर्शक ग्रंथों में विरोधाभास पाते हैं. इस विरोधाभास का जवाब इसी से दिया जा सकता है कि ऐसा केवल सनातन धर्म में नहीं. कई बार तो विज्ञान में भी ऐसी बात आती है. जैसे, विज्ञान हमें बताता है कि शून्य तापमान पर पानी बर्फ बन जाता है. वही विज्ञान हमें यह भी बताता है कि पानी शून्य डिग्री से भी कम तापमान पर भी कुछ खास स्थितियों में अपने मूल स्वरूप में रह सकता है. इसका जो जवाब है, वही सनातन धर्म के संदर्भ में भी है. जैसे, विज्ञान के लिए दोनों ही तथ्य सही है, भले ही वह आपस में विरोधाभासी हों,और विज्ञान को झुडलाते हों उसी तरह सनातन धर्म भी अपने खुलेपन की वजह से कई सारे विरोधी विचारों को ख़ुद में समेटे रहता है.परन्तु सनातनधर्म में जो स्काई है उसे नकारा भी तो नही जा सकता हम पहले भी कह चुके हैं-एकं सत, विप्रा बहुधा वदंति-उसी तरह किसी एक सत्य के भी कई सारे पहलू हो सकते हैं. कुछ ग्रंथ यह कह सकते हैं कि ज्ञान ही परम तत्व तक पहुंचने का रास्ता है, कुछ ग्रंथ कह सकते हैं कि भक्ति ही उस परमात्मा तक पहुंचूने का रास्ता है. सनातन धर्म में हर उस सत्य या तथ्य को जगह मिली है, जिनमें तनिक भी मूल्य और महत्व हो. इससे भ्रमित होने की ज़रूरत नहीं है. आप उसी रास्ते को अपनाएं जो आपके लिए सही और सहज हो. याद रखें कि एक रास्ता अगर आपके लिए सही है, तो दूसरे रास्ते या तथ्य ग़लत हैं. साथ ही, सनातन धर्म खुद को किसी दीवार या बंधन में नहीं बांधता है. ज़रूरी नहीं कि आप जन्म से ही सनातनी हैं. सनातन धर्म का ज्ञान जिस तरह किसी बंधन में नहीं बंधा है, उसी तरह सनातन धर्म खुद को किसी देश, भाषा या नस्ल के बंधन में नहीं बांधता. सच पूछिए तो युगों से लोग सनातन धर्म को अपना रहे हैं.सनातनधर्म के नियमों का यदि गहराई से अध्ययन किया जाएतो मन स्वयम ही इसकी सचाई को मानने को तयार हो जाता हे .विज्ञान जिस तरहा बिना गयान के अधूरा है .सनातन धर्म भी बिना ज्ञान हानि कारक है . ज्ञान मनुष्य के आस पास होता है.उसके भीतर होता है .इस का एक उदहारण देखिये
हवन यग्य आदि का शास्त्रों में कोई विधि विधान कहा गया है .कि इसे किस महूर्त में किस आसन पर बैठ कर किस प्रकार के भोजन का इस्तेमाल करते हुए करना चाहिए .इतना सा ज्ञान तो कुछ पेचीदा नही है . परन्तु इस ज्ञान के बिना किये गये हवन यग्य हानीही करें गे यह ज्ञान भी पेचीदा नही है .देखने सुनने में आता हे कि अज्ञानी लोग प्रति दिन आर्यसमाज ,मन्दिरों ,घरों ,में नित्य-नियम बनाकर हवन यग्य आदि करते रहते हैं .जब अनिष्ट फल प्राप्त होता है .तब सनातन धर्म क़ी नरमाई का लाभ उठाते हुए सनातन धर्म का त्याग कर देते हैं .और इस पुरातन सनातन धर्म क़ी खामिया तलाश ने लगते है जब क़ी सनातन धर्म अपने आप में सम्पूर्ण सचा सुचा धर्म है .